गन्ने की शीघ्र पकने वाली 5 उन्नत प्रजातियों से मिलेगी अधिक उपज, किसान भाई बन सकते है मालामाल

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ganne ki shighra pakne vali 5 prajatiyan
शीघ्र पकने वाली 5 उन्नत प्रजातियों से मिलेगी अधिक उपज

गन्ने की शीघ्र पकने वाली 5 उन्नत प्रजातियों से मिलेगी अधिक उपज 

साल के दूसरे महीने फरवरी की शुरुवात हो चुकी है. जहाँ देश के किसान रबी फसलों की खेती में व्यस्त वही वह बसंत कालीन गन्ने की बुवाई के लिए तैयारियां भी कर रहे है. क्योकि बसंत कालीन गन्ने की बुवाई का उपयुक्त समय फरवरी से लेकर मार्च तक सबसे उपयुक्त होता है.

गन्ने की खेती में अच्छी उपज के लिए किसान भाई लगातार उन्नत कृषि क्रियाएं अपनाते है. लेकिन उन्नत कृषि क्रियाओं के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण भूमिका गन्ने की उन्नत प्रजातियों की भी होती है. क्योकि गन्ने के अच्छे बीज की बुवाई से ही अच्छा उत्पादन होगा. ऐसे में किसानों के सामने गन्ने की उन्नत प्रज्तियों के चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है. इसीलिए गाँव किसान के इस लेख में हम गन्ने की शीघ्र पकने वाली 5 प्रजातियों की जानकारी आप को देने वाले है. तो आइये जानते है विस्तार से –

गन्ने की शीघ्र पकने वाली 5 प्रजातियाँ 

गन्ने की शीघ्र पकने वाली सीओ- 87283 प्रजाति 

गन्ने की इस प्रजाति को सरयू भी कहा जाता है. इस प्रजाति को साल 2000 में कृषि वैज्ञानिको द्वारा विक्सित किया गया था. गन्ने की यह प्रजाति फरवरी से मार्च के बीच बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त रहती है. इस प्रजाति की उपज लगभग 66.3 टन प्रति हेक्टेयर तक पायी गयी है. वही इसके गन्ने के रस में चीनी की 17.4 प्रतिशत तक की मात्रा पायी जाती है.

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गन्ने की यह प्रजाति स्मट, लाल सड़न, तना बेधक आदि रोगों के प्रति अवरोधी पायी जाती है. इसके अलावा सूखा एवं जलभराव के प्रति सहिष्णु भी होती है.

गन्ने की शीघ्र पकने वाली सीओ- 87268 प्रजाति 

गन्ने की इस प्रजाति को मोती के नाम से भी पुकारा जाता है. इस प्रजति को भी साल 2000 में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया. गन्ने की इस प्रजाति की बुवाई का उपयुक्त समय फरवरी से मार्च तक का है. इसकी उपज की बात की जाय तो 78.9 टन प्रति हेक्टेयर के लगभग है. वही इसके रस में चीनी की मात्रा लगबग 17.5 प्रतिशत के आसपास पायी जाती है.

गन्ने की यह मोती प्रजाति स्मट, आंशिक रूप से लाल सड़न रोग के प्रति अवरोधी पाई जाती है. साथ ही यह सूखा एवं जलभराव के प्रति सहिष्णु पायी जाती है.

गन्ने की शीघ्र पकने वाली सीओ-89029 प्रजाति

गन्ने की इस प्रजाति को गन्दक नाम से भी जाना जाता है. इसको कृषि वैज्ञानिको द्वारा साल 2001 में खोजा गया था. इस प्रजाति को भी फरवरी से लेकर मार्च तक बुवाई के लिए उपयुक्त पाया गया है. इसकी उअपाज की बात करे तो यह गन्ने की प्रजाति प्रति हेक्टेयर लगभग 70.6 टन तक उपज देने में समर्थ पायी गयी है. इसमें चीनी की मात्रा लगभग 16.3 प्रतिशत तक पायी जाती है.

गन्ने की यह प्रजाति आंशिक रूप से लाल सड़न रोग, शिखा बेधक, तना बेधक के प्रति अवरोधी पायी जाती है. वही सूखा और जलभराव के प्रति सहिष्णु होती है.

गन्ने की शीघ्र पकने वाली सीओ एच-2201 प्रजाति 

गन्ने की इस प्रजाति को हरियाणा 92 भी कहा जाता है. इसे भी कृषि वैज्ञानिको ने साल 2001 में विकसित किया था. इस प्रजाति को भी फरवरी से मार्च तक बुवाई के लिए उपयुक्त पाया गया है. गन्ने की इस प्रजाति की उपज 70 टन प्रति हेक्टेयर तक पायी गयी है. इसके रस में सर्करा की मात्रा 18.2 प्रतिशत तक पायी जाती है.

गन्ने की यह प्रजाति आंशिक रूप से लाल सड़न रोग के प्रति अवरोधी होती है.

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गन्ने की शीघ्र पकने वाली सीओएसई-95422 प्रजाति 

गन्ने की इस प्रजाति को रसभरी के जाना जाता है. गन्ने की इस किस्म को साल 2001 में कृषि वैज्ञानिको द्वारा खोजा गया. यह किस्म भी बुवाई के लिए फरवरी से मार्च तक उपयुक्त पायी गयी है. इसकी उपज की बात करे तो किसान भाई इससे लगभग 67.8 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज प्रप्त कर सकते है. वही इसमें चीनी की मात्रा 17.7 प्रतिशत तक होती है.

गन्ने की यह प्रजाति भी आंशिक रूप से लाल सड़न रोग के प्रति अवरोधी पायी गयी है.

नोट – किसान भाईयों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए,किसी भी फसल या प्रजाति एवं किस्म का चुनाव अपने क्षेत्र के हिसाब से करना लाभकारी होता है. इसलिए किसी भी प्रजाति को चुनाव करने से पहले अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय से सम्पर्क कर उचित राय जरुर ले ले. इससे आपको खेती में अधिक मुनाफा प्राप्त हो सकेगा.

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