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सेंजी चारा (melilotus alba) – असिंचित क्षेत्रों की महत्वपूर्ण चारा फसल

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सेंजी चारा
सेंजी चारा (melilotus alba) असिंचित क्षेत्रों की महत्वपूर्ण चारा फसल

सेंजी चारा (melilotus alba) असिंचित क्षेत्रों की महत्वपूर्ण चारा फसल

नमस्कार किसान भाईयों, सेंजी चारा कम पानी वाले स्थानों पर या असिंचित भागों में उगाई जाने वाली चारे की एक महत्वपूर्ण फसल है. इसलिए यह पशुओं को आसानी से उपलब्ध हो जाती है. आज गाँव किसान (Gaon Kisan) अपने इस लेख में सेंजी चारा की पूरी जानकारी देगा –

सेंजी चारा के फायदे 

इसका चारा पशुओं के लिए काफी पौष्टिक होता है. इसके हरे चारे में पानी 77.8 प्रतिशत, प्रोटीन 3.8 प्रतिशत, नाइट्रोजन 2.3 प्रतिशत, नाइट्रोजन रहित निष्कर्ष 9.7 प्रतिशत, कुल पाचनशील तत्व 13.2 प्रतिशत पाए जाते है. जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद होता है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र 

सेंजी का वानस्पतिक नाम मेलीलोटस अल्बा (Melilotus alba) है. इसका पौधा लगभग 1.2 मीटर ऊँचा पौधा है. पहले यह भारत के कुछ राज्यों में खरपतवार के रूप में उगती थी लेकिन अब यह चारे की फसल के रूप में उगाया जा रहा है. इसकी उत्पत्ति भारत सन 1949 में भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान ने की थी. इसकी तीन विशेष जातियां पायी जाती है. मेलिलोटस इंडिका, मेलिलोटस पार्विफ्लोरा और मेलिलोटस अल्बा है.

सेंजी की फसल चारे के लिए भारत में मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों एवं उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भागों में उगाई जाती है. इसके अलावा यह फसल खरपतवार के रूप में पूरे भर में उगती है.

संयुक्त राज्य अमेरिका और आस्ट्रेलिया में यह स्वीट क्लोवर नाम से चरागाहों में उगाई जाती है. इन देशों में अधिकतर सफ़ेद पुष्प वाली सेंजी ही उगाई जाती है. यह पानी की कमी वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है.

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जलवायु एवं भूमि 

सेंजी प्रायः सर्दियों को एकवर्षी फसल है. अच्छी उपज के लिए उत्तरी भारत में इसे एक सिंचित फसल के रूप में उगाया जाता है.

इसकी खेती अम्लीय भूमि पर नही की जाती है यह सूखारोधी फसल है. इसके लिए बरसीम के समान जलवायु एवं वर्षा आदि की आवश्यकता पड़ती है.

फसल-चक्र

सेंजी को प्रायः गन्ने वाले खेतों में गन्ने की बुवाई के पहले उगाते है. इसमें गन्ना बुवाई के पहले खेत खाली हो जाती है. और उसकी तैयारी अच्छी होती है. इसके लिए कुछ उपयुक्त फसल-चक्र निम्न है-

  1. मक्का (दाना) + सेंजी-गन्ना (द्विवर्षीय फसल-चक्र)
  2. ज्वार (चारा) – सेंजी-गन्ना (द्विवर्षीय फसल-चक्र)
  3. ज्वार (मक्का) – सेंजी-सूडान घास (एक वर्षीय फसल चक्र)
  4. मक्का (दाना) – सेंजी-सूडान घास (एक वर्षीय फसल चक्र)
  5. ज्वार (चारा) – सेंजी-मक्का लोबिया (एक वर्षीय फसल चक्र)
  6. कपास – सेंजी (एक वर्षीय फसल चक्र)

उन्नत किस्में 

सेंजी की ज्यादातर की स्थानीय जातियां ही प्रचलित है. लेकिन YSL 106 जिसकी पैदावार 128 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक है. इसकी वृध्दि भी अच्छी होती है. इसके अलावा सेंजी सफ़ेद 76 इसके हरे चारे की भी पैदावार 128 कुंटल प्रति हेक्टेयर है.

खेत की तैयारी 

सर्दियों की फसल होने के कारण सेंजी असिंचित क्षेत्र की फसल के रूप में उगाई जाती है. उपजाऊ, दोमट भूमि वाले खेत में सेंजी को उगाया जाता है. बुवाई से पहले खेत को अच्छी प्रकार तैयार करना आवश्यक है. यह थोड़े दिन तक ही हरा चारा दे सकती है. इसके लिए एक जुताई तथा 3 से 4 बार हैरों चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए.

बुवाई 

इसकी फसल प्रायः मक्का या कपास की खड़ी फसलों में सितम्बर-अक्टूबर के माह में बोई जाती है. इसके बीज को खड़ी फसल में छिटककर गुड़ाई कर देते है. शुध्द फसल के लिए इसकी बुवाई अक्टूबर के माह में लाइनों में या छिटककर करते है. इसकी बीज दर 12 से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जरुरत होती है. छोटे बीज होने कारन बुवाई के समय इसके साथ उतनी ही मात्रा में भुरभूरी मिट्टी मिला देते है. इससे बीजों को बोने में सुविधा होती है. सफेद सेंजी मेलिलोटस अधिक दिन तक हरा चारा देती है. इससे चारे की तीन कटाने ली जा सकती है. सेंजी प्रायः जई तथा अन्य रबी की फसलों के साथ मिलाकर भी बोई जाती है.

खाद एवं उर्वरक 

इसकी अच्छी पैदावर के लिए 25 किलोग्राम नाइट्रोजन तथा 60 किलोग्राम फ़ॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए. इससे उपज में वृध्दि होती है. ये उर्वरक बुवाई के पहले आखिरी हैरों के साथ खेत में डालना चाहिए. इससे पौधों की बढ़ोत्तरी तथा पैदावार अधिक हो जाती है.

सिंचाई एवं जल निकास  

सेंजी की अधिक उपज के लिए खेत में जल-निकास का अच्छा प्रबंध होना आवश्यक है. मक्का के खेत में मक्का की कटाई के खेत में मक्का की कटाई के एक-डेढ़ सप्ताह पहले सेंजी के बीज को छिटक कर मिट्टी में मिला देना चाहिए. इसके पश्चात  यदि नमी में कमी हो, तो सिंचाई करना आवश्यक है. इस प्रकार कुल 3 से 4 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है. यदि संभव हो, तो कटाई के तुरंत बाद सिंचाई करने से उपज में वृध्दि होती है.

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फसल सुरक्षा 

सेंजी से खरपतवार का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है. इसलिए खरपतवार नियंत्रण का कोई महत्त्व नही है. इसके अतरिक्त भारत में सेंजी में कोई विशेष बीमारी एवं कीड़ों का भी प्रकोप नही देखा गया है.

कटाई-प्रबन्धन तथा उपज 

सेंजी से सामान्यतः 300 से 400 कुंटल हरा चारा प्रति हेक्टेयर प्राप्त हो जाता है. अधिक पौष्टिकता के लिए इसकी कटाई फलियाँ बनने की अवस्था में की जानी चाहिए. पहले काटने से उपज कम होने की संभावनाएं पाई जाती है. इसके चारे को सुखाकर हे भी बनाया जा सकता है.

इसकी पहली कटाई बुवाई के 65 से 70 दिन बाद करनी चाहिए. इसके अलावा शेष दो कटाने 30 से 35 दिनों के अंतर पर करनी चाहिए. इसमें कुल 3 से 4 कटाईयां ली जा सकती है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) के सेंजी चारा से सम्बंधित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पाई होगी. फिर भी सेंजी चारा से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा गाँव किसान (Gaon Kisan) का यह लेख कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताये, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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