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खुबानी की खेती (Apricot farming) की पूरी जानकारी (हिंदी में)

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खुबानी की खेती
खुबानी की खेती (Apricot farming) की पूरी जानकारी

खुबानी की खेती (Apricot farming) की पूरी जानकारी

  नमस्कार किसान भाईयों खुबानी की खेती (Apricot farming) देश के ठन्डे प्रदेशों में की जाती है. यह एक शुष्क मेवा है. जिसे लोग बड़े चाव से खाते है. इसके पौधे उगाकर किसान भाई अच्छा लाभ ले सकते है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में खुबानी की खेती (Apricot farming) की पूरी जानकारी देगा, वह भी अपने देश की भाषा हिंदी में. जिससे किसान भाई इसकी अच्छी उपज ले पाए. तो आइये जानते है खुबानी की खेती (Apricot farming) की पूरी जानकारी-

खुबानी के फायदे  

भारत में सूखी खुबानी को बादाम, अखरोट और न्योजे की तरह खुश्क मेवा की तरह उपयोग किया जाता है. खुबानी का रंग जितना चमकीला होता है. इसमें विटामिन सी और ई और पोटेशियम की मात्रा उतनी ही ज्यादा पायी जाती है. सूखी खुबानी में ताज़ी खुबानी की तुलाना में 12 गुना लौह तत्व, सात गुना आहारीय रेशा और पांच गुना विटामिन ए होता है. सुनहरी खुबानी में कच्चे आम व चीनी मिलाकर बहुत स्वादिष्ट चटनी बनती है. खुबानी का पेय भी बहुत स्वादिष्ट होता है. जिसे एप्रीकॉट नेक्टर कहते है.

खुबानी की गुठली के अन्दर का बीज एक छोटे बादाम की तरह दिखता है. और खुबानी की बहुत सारी किस्मों में इसका स्वाद एक मीठे बादाम सा होता है. लेकिन खुबानी का बीज बच्चों को नही खिलाना चाहिए. क्योकि यह हल्का जहरीला होता है. बड़े व्यक्ति खा सकते है लेकिन एक बार में 5 से 10 बीजों से अधिक नही खाने चाहिए.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र

खुबानी का वानस्पतिक नाम प्रूनस आरमीनिआका (Prunus armeniaca Lonn.) है. यह रोजेसी (Rosaceae) कुल का पौधा है. इसको अंग्रेजी में एप्रिकौट (Apricot) कहते है. खुबानी की उत्पति उत्तर पश्चिम देशों विशेषकर अमेरिका माना जाता है. विश्व में अमेरिका, तुर्की, भारत, पकिस्तान आदि देशों में की जाती है. भारत में इसकी खेती हिमाचल प्रदेश, उत्तराँचल व अन्य ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में की जाती है. तुर्की में विश्व सबसे बड़ा खुबानी उत्पादक देश है.

जलवायु एवं भूमि

खुबानी की खेती के लिए ठंडे क्षेत्र, जहाँ गर्मी प्रारंभ होने से पूर्व पाले का भय न हो तथा गर्मियों का तापमान 16.6 डिग्री० से 32.2 डिग्री तक होना उत्तम रहता है. हिमालय के उत्तरी पश्चिमी भागों में 1000 से 2000 मीटर की ऊंचाई तक उगाया जा सकता है.

इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है. भूमि का पी० एच० मान लगभग 7 के आसपास का होना चाहिए. इस बात ध्यान रखे भूमि में जल निकास का उचित प्रबन्धन होना चाहिए.

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उन्नत किस्में  

खुबानी की निम्न लिखित उन्नत किस्में देश में उगाई जाती है.

  • हिमाचल प्रदेश, मध्य ऊँचे क्षेत्रों के लिए न्यूकेस्टल, कैशा, अर्ली सिप्ले आदि प्रमुख उन्नत किस्में है.
  • अधिक ऊँचे क्षेत्रों के लिए अर्ली सिप्ले, सफेदा, चारमग्ज, सकरपारा आदि प्रमुख उन्नत किस्में है.
  • सूखे ठन्डे क्षेत्र के लिए चारमग्ज, सफेदा, सकरपारा, कैशा आदि प्रमुख किस्में है.
  • अगेती किस्मों में अर्ली सिप्ले, न्यूलार्जअर्ली, चारमग्ज आदि प्रमुख किस्में है.
  • पछेती किस्मों में टर्की, मोरपार्क, कैशा, रॉयल, सेंट अम्ब्रोज आदि प्रमुख किस्में है.
  • उत्तराँचल की अगेती किस्में में चारमग्ज, चौबटिया, अलंकर, चौबटिया मधु, चौबटिया केसरी आदि प्रमुख किस्में है.
  • उत्तराँचल की पछेती किस्मों में टर्की प्रमुख उन्नत किस्में है.

 खेत की तैयारी 

खुबानी के पौधे अच्छी तरह वृध्दि कर सके इसके लिए लगाने वाली जगह को अच्छी प्रकार तैयार कर लेना चाहिए. इसके लिए खेत को सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई कर लेनी चाहिए. इसके बार दो तीन जुताई कल्टीवेटर से करके पाटा लगा देना चाहिए. जिससे जमीन समतल हो जाय. इस बात का ध्यान रखे की खेत से जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए.

प्रवर्धन की विधियाँ 

पौधे लगाने के लिए सबसे पहले पौध तैयार की जाती है. इसकी पौध को तैयार करने के लिए जीभी कलम, छल्ला चश्मा, ढाल चश्मा आदि प्रवर्धन की विधियां अपनाई जाती है. कलम विधि से प्रवर्धन के लिए फरवरी का महीना उपयुक्त रहता है. वही चश्मा चढाने के लिए मई-जून का महीना उपयुक्त होता है. बलुई मिट्टी के लिए खुबानी के मूलवृंत का प्रयोग करना चाहिए.

पौधा लगाने का समय एवं दूरी

खुबानी का पौधा लगाने के लिए जनवरी-फरवरी का महीना सबसे उपयुक्त होता है. इसके लिए तैयार खेत की समतल भूमि में पंक्तियों में गड्ढे खोद लेने चाहिए. पौधे की आपस में दूरी 5 x 5 मीटर होनी चाहिए.

इन गड्ढों की खुदाई पौधा लगाने से एक महीना पहले कर लेना चाहिए. प्रत्येक गड्ढे में गोबर की सड़ी हुई खाद और मिट्टी बराबर मात्रा में मिलाकर भर देना चाहिए. बाद में इसमें पानी डाला देना चाहिए. जिससे मिट्टी अच्छी तरह बैठ जाय. इसके उपरांत इन गड्ढों में पौधों को लगाकर मिट्टी को अच्छी तरह से चारों ओर से दबा देना चाहिए.

खाद एवं उर्वरक 

खुबानी के पौधे की अच्छे विकास और उपज के लिए हर साल उचित मात्रा में खाद एवं उर्वरक देना चाहिए. इसके लिए गोबर की सड़ी हुई खाद 10 किग्रा०, 90 ग्राम नाइट्रोजन, 30 ग्राम फ़ॉस्फोरस, 90 ग्राम पोटाश प्रति पेड़ वर्ष के हिसाब से बढ़ाकर 6 वर्ष तक डाली जाती है. इसके बाद मात्रा स्थिर कर देनी चाहिए. गोबर की सड़ी हुई खाद, फ़ॉस्फोरस व पोटाश की सम्पूर्ण मात्रा दिसम्बर-जनवरी में तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा फूल आने के पहले, शेष आधी मात्रा फूल आने से पहले, शेष आधी मात्रा एक माह बाद देनी चाहिए.

सिंचाई  

खुबानी के पौधों की अच्छी वृध्दि के लिए नियमित अंतराल पर सिंचाई करना चाहिए. पौधे लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करनी चाहिये. इसके बाद जाड़े के मौसम में आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए. गर्मी के मौसम में 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिये.

सधाई एवं काट-छांट  

खुबानी की सधाई मध्य खुली और रूपांतरित अग्र प्ररोह विधि से करते है. बड़े पौधे आवंछित रोगी एवं कीत्युक्त और तीन वर्ष पुराने मरे हुए दलपुटों को निकाल देना चाहिए. इसके अतरिक्त फलों का विरलन करना भी आवश्यक होता है. फलों का विरलन इस तरह करना चाहिए कि उनकी आपस की दूरी 10 से 14 सेमी० हो जाय.

बाग़ में उगाई जाने वाली फसलें 

खुबानी के पौधे तैयार होने में चार से पांच साल लग जाते है ऐसे में किसान भाई पौधे के बीच की जमीन पर सब्जियां उगाकर अच्छा लाभ कमा सकते है.

फूल एवं फल आने का समय 

खुबानी के पौधे चार से पांच साल बाद उपज देना शुरू कर देते है. इनके पौधों में फूल आने का समय फरवरी से मार्च तक का होता है. इसके अलावा फल मई से जून तक पककर तैयार हो जाता है.

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फल की तुड़ाई 

तैयार खुबानी के पौधों में मई से जून तक फल पक तैयार हो जाते है. इसके फल अलग-अलग किस्मों के आधार पर अलग-अलग रंग के दिखाई देते है. जो पकने के बाद नर्म हो जाते है. पके हुए फलों को तुड़ाई कर लेनी चाहिए. और इनकी छंटाई कर बाजार के लिए भेज सकते है.

उपज 

खुबानी की उपज की बात की जाय तो एक वृक्ष हर साल करीब-करीब 50 से 80 किलों फल प्रति वर्ष प्राप्त किये जा सकते है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) का खुबानी की खेती (Apricot farming) से सम्बंधित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होंगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा खुबानी के फायदे से लेकर खुबानी की उपज तक की सभी जानकारियां दी गयी. फिर भी खुबानी की खेती (Apricot farming) से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलाव गाँव किसान (Gaon Kisan) का यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताएं. महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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