खरगोश पालन कैसे करे ? जिससे हो लाखों रुपये कमाई | Rabbit farming

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खरगोश पालन कैसे करे
खरगोश पालन कैसे करे ? जिससे हो लाखों रुपये कमाई | Rabbit farming

खरगोश पालन कैसे करे ? जिससे हो लाखों रुपये कमाई | Rabbit farming 

नमस्कार किसान भाइयों, खरगोश पालन (Rabbit Farming) मुख्यत: मांस, चमड़ा, ऊन तथा प्रयोगशाला में शोध एवं मनोरजंन हेतु किया जाता है. खरगोश पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसको घर में भी आसानी से किया जा सकता है. क्योकि यह कम खाद्य पर कम निवेश एवं अधिक प्रजनन क्षमता वाला प्राणी है.

भारत में खरगोश पालन की शुरुवात 1950 में की गयी थी. जिसमें शासन द्वारा विदेशों से खरगोश आयत किये गए थे. वर्तमान समय में खरगोश पालन हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल महाराष्ट्र आदि राज्यों में सफलता पूर्वक किया जा रहा है. इसलिए आज गाँव किसान अपने इस लेख में खरगोश पालन कैसे करे ? जिससे अच्छी आमदनी हो, की पूरी जानकारी देगा.

खरगोश पालन के फायदे

खरगोश पालन मुख्य रूप से मांस के लिए किया जाता है. इसका मांस सबसे पौष्टिक मांस समझा जाता है. क्योकि इसमें प्रोटीन की सबसे अधिक मात्रा होती है एवं वसा व कॉलेस्ट्रोल कम पाया जाता है तथा यह मांस सबसे कम कैलोरी का होता है. लेकिन इसकी खाल से पर्स, जैकेट, टोपियाँ, मोज़े, खिलौने आदि बनाये जाते है.

इस सभी के अलावा इसके पालने के निम्न लाभ एवं विशेषताएं है.

  • खरगोश के खाने पर लागत बहुत लगाती है. क्योकि यह हरी घास, सब्जियों के पत्ते फसल के अतरिक्त का हिस्सा, गाजर, लुसर्न घास, वरसीम, चरई, नेपियर घास आदि खाता रहता है.
  • खरगोश की वृध्दि दर अत्याधिक उच्च होती है. ये तीन से पांच माह में 2.5 से 4 किलो तक वजन हो जाता है.
  • खरगोश का प्रजनन काल 30 दिन का होता है यह एक बार में 6 से 12 बच्चे देती है, एवं एक साल में 8 बार बच्चे देती है. और 5 से 5 साल तक लगातार बच्चे देती रहती है.
  • खरगोश का जीवन काल 10 से 12 साल तक का होता है.
  • खरगोश केवल तीन माह में ही मांस के लिए तैयार हो जाता है.

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खरगोश की उन्नत नस्लें

खरगोश की प्रजातियाँ निम्नवत है –

  • व्हाइट जायंट – White gaint
  • न्यूजीलैंड व्हाइट – Newzealand White
  • फ्लेमिस जायंट – Flemish Gaint
  • चिंचिला – Chincilla
  • ग्रे जायंट – Grey Gaint
  • कैलीफार्मिया – Califormian
  • न्यूजीलैंड ब्लैक – New Zealand Black

खरगोश पालन में ध्यान रखने वाली बातें

  • खरगोश पालन बहुत सरल व साफ़ सुथरा व्यवसाय है. इसको लगे घर के आँगन, छत, बालकनी एवं फ़ार्म हाउस पर सकते है.
  • खरगोश पालन हमेशा जाली में किया जाना चाहिए क्योकि इससे हमारा फ़ार्म मैनेजमेंट रिकार्ड में व्यवस्थित रहता है. जाली पद्यति से फार्म की साफ़-सफाई करने में आसानी रहती है. एवं मादा खरगोश को नर से क्रॉसिंग करानी चाहिए.
  • खरगोश को दलिया (गेहूं, मक्का, सोयाबीन, ज्वार, बाजरा, चना, चावल ) या पंतजलि दुग्धाम्रत पूरक पशु आहार, पानी एवं हरा चारा (हरी घास) देने में आसानी रहती है. साथ में यह भी पता करने में आसानी हो जाती कि खरगोश पूरा आहार लिया है कि नही. अगर नही लिया तो उसके कारणों को आसानी से पता कर उसकी उचित देखभाल कर पाते है.
  • बच्चो के जन्म होने पर, उनकी देखभाल में आसानी होती है.
  • पिंजरा जमीन से 2 फुट की ऊंचाई पर होना चाहिए. इसके अलावा एक खरगोश के लिए 4 वर्ग फुट जगह होनी चाहिए.
  • पिजरें हो हर तीन महीने में ब्लों लैंप से जलाना चाहिए.
  • बिना वजह खरगोश को छेड़छाड़ नही करनी चाहिए.
  • हर खरगोश के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखनी चाहिए. किसी नौकर के भरोसे नहीं रहना चाहिए.
  • हर तीन महीने में डीवर्मिंग करना चाहिए और सम्पूर्ण रिकार्ड मेंनटेनेंस रखना चाहिए.

खरगोश के लिए आवास निर्माण कैसे करे ?

खरगोश पालन के लिए हवा का निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए. शुध्द हवा के अभाव में खरगोश के श्वसन सम्बन्धी बीमारियाँ हो जाती है. इसलिए तार के जाल का प्रयोग किया जाता है. इसके आवस के लिए तार के जाल से बने ग्रीड जो कि एक वर्गाकार आकृति बनाते है जिससे खरगोश का मलमूत्र अपने आप पिंजरे के बाहर निकल जाता है.

पिंजरों का आकार कितना रखे 

खरगोश के आकार पर ही पिंजरों का निर्माण करना चाहिए –

खरगोश की नस्ल  वजन  पिंजरे का आकार 
छोटी नस्ल के लिए (1-2 किग्रा०) 30x30x12 इंच
मध्यम नस्ल के लिए (2.5-3 किग्रा०) 30x36x12-14 इंच
बड़ी नस्ल के लिए (3.5-5 किग्रा०) 30×40-48×14-16 इंच

मादा खरगोश की पहचान 

सामान्यतया शारीरिक रूप से एक मादा खरगोश अपने बड़े सिर के कारण एक नर खरगोश से आकार में बड़ी होती है. नर खरगोश में लैंगिक अंग गोलाकार आकृति लिए हुए बाहर निकला होता है. जबकि मादा खरगोश में लैंगिक अंग v आकार या स्लीट आकार का होता है. जब नर खरगोश के लिंग व वृषण परिपक्व हो जाते है. तो उसे आसानी से प्रेक्षित किया जा सकता है.

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मादा खरगोश के ऋतु लक्षण कैसे जाने 

खरगोशों में कोई विशिष्ट ऋतुचक्र नही होता है. जब कभी मादा खरगोश नर खरगोश को सम्भोग के लिए छूट देती है. तभी मादा खरगोश का ऋतुचक्र होता है. कभी-कभी यदि मादा खरगोश उत्तेजक होती है. तो उसकी योनि संकुचित होती है. जब नर खरगोश उत्तेजना या ऋतुचक्र में मादा खरगोश उदासीनता दिखाती है. और अपने शरीर के पिछले हिस्से को ऊपर नही उठाती है. उसी समय यदि मादा खरगोश उत्तेजक नही होती, तो वह पिंजरे के एक कोने में चली जाती है. और नर खरगोश पर हमला कर देती है. उत्तेजक संकेत देने वाली मादा खरगोश को नर खरगोश के पिंजरे में रखा जाता है.

खरगोशों में प्रजनन काल 

नर : मादा अनुपात 7:3
पहले सम्भोग के समय आयु 6-8 महीने | नर खरगोश पहले सम्भोग के दौरान अच्छे लेयर आकार के लिए आमतौर पर 1 : 1 वर्ष के होते है.
सम्भोग के समय मादा खरगोश का वजन 2 से 2.5 किलोग्राम
वृध्दि का समय (गर्भकाल) 28 से 31 दिन
दूध छुडाने की उम्र 3-4 सप्ताह
किडलिंग के बाद सम्भोग का समय किडलिंग के 4 सप्ताह बाद या छोटे खरगोशों के दूध छुडाने के बाद
बेचने का समय/आयु 12 सप्ताह
बेचते समय का वजन लगभग 12 किलों या उससे ज्यादा

खरगोश को आहार में क्या दे ?

खरगोश एक शाकाहारी प्राणी है. इसलिए इन्हें बरसीम, लुर्सन घास, हरी पत्तीदार सब्जियां जैसे पत्तागोभी, फूलगोभी तथा झाड़ के पत्ते और गाजर इनका पसंदीदा आहार है. इनका आहार संतुलित होना चाहिए और आहार में प्रोटीन होना जरुरी है. प्रोटीन, सोयाबीन व फल्लीदाना की खली से दिया जाता है.

एक खरगोश एक दिन में 100 से 150 ग्राम दलिया व 200 से 500 ग्राम हरी घास खाता है. एक खरगोश एक दिन में आधा से एक लीटर पानी पीता है.

खरगोश पालन में खरगोशों को संतुलित एवं आसानी से पचने वाला आहार देना चाहिए. खरगोशों को उनकी शारीरिक विकास के हिसाब से खाद्य पदार्थ देना चाहिए. इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, क्षार खनिज एवं शुध्द पानी अति आवश्यक है. खरगोशों को सुबह, दोपहर व शाम दिन में तीन बार खाना देना चाहिए.

खरगोशों में होने वाली बीमारियाँ एवं उनकी रोकथाम 

बीमारियाँ  लक्षण  उपचार 
कॉक्सीडियोसिस भूख बंद होना, बालों के आवरण का खुरदरा होना,वजन का घटना साफ़ सफाई, पानी में सल्फा औषधि
वेंट डिजिज वेंट में सूजन, जलन, पपड़ीनुमा हो जाना पपड़ी हटाना एवं एंटीबायटिक मलहम
सॉर आइज आँखों के चारों तरफ पानी जैसा एवं दूधनुमा स्व्राव विटामिन ए की मात्रा को बढ़ाना एवं आँखों में ऑफ़थेलेमिक एंटीबोयटिक डालना
सॉर हाक्स हौंक जोड़ में सॉर होना एंटीबोयटिक्स
स्लोबरस अत्यधिक लार गिरना हरी घास की मात्रा कम कर देना

 

तो दोस्तों इस लेख में खरगोश पालन कैसे करे ? की पूरी जानकारी मिल पायी होगी. फिर भी आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. धन्यवाद

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