आम का पर्णजालक कीट | Leaf webbers | Mango pests

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आम का पर्णजालक कीट
आम का पर्णजालक कीट | Leaf webbers

आम का पर्णजालक कीट | Leaf webbers

नमस्कार किसान भाईयों, आम का पर्णजालक कीट भी आम की हरी मुलायम पत्तियों, कलियों और टहनियों को नुकसान पहुंचाता है. जिससे आम के पौधे को काफी नुकसान पहुंचता है. जिससे किसान भाईयों को आम की अच्छी उपज नही प्राप्त हो पाती है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में आम का पर्णजालक कीट की पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भाई आम के इस कीट के प्रकोप से बच सके. तो आइये जानते है आम का पर्णजालक कीट की पूरी जानकारी-

आम का पर्णजालक कीट की पहचान 

यह वयस्क कीट मध्यम आकार के, भूरे स्लेटी रंग के पतंगे होते है. पंखों की फैली हुई अवस्था में यह 26 से 30 मिमी० लम्बे होते है. अगले पंखों पर गहरे रंग के धब्बे पाए जाते है. पिछले पंख सफ़ेद होते है. और इनकी शिराएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है. मेकाला मोंकुसेलिस जाति की इल्लियाँ लगभग 25 मिमी० लम्बी, भूरे रंग की होती है. इसके प्रष्ठ भाग पर भद्दे पीले रंग की धारियां पायी जाती है. और इन पर गहरे रंग की आड़ी पत्तियां पायी जाती है. मेकाला (लेमिडा) मोंकुलेसिस (Macalla (Lamida) moncusalis) भी आम पर पाया जाता है. परन्तु इसका प्रकोप कम होता है.

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कीट पाया जाने वाला क्षेत्र 

भारत में यह कीट मध्य और दक्षिण क्षेत्र में अधिक पाया जाता है.

आम को क्षति

इस कीट की इल्लियाँ हानिकारक होती है. अण्डों से निकलने के बाद छोटी-छोटी इल्लियाँ मुलायम पत्तियों पर समूह में खाती है. ये पत्तियों की वाहया भित्ति को खुरचकर खाती है. थोड़ा बड़े हो जाने पर ये पत्तियों की रेशमी धागों की मदद से आपस में जोड़कर जाला जैसा बनाती है. इस जले के अन्दर ही अन्दर ये मुलायम पत्तियों, टहनियों और कलियों को खाती है.

अन्य परपोषी पौधे 

यह कीट आम के अलावा अन्य फल वृक्षों पर नही पाया जाता है.

कीट का जीवन चक्र 

इस कीट का वैज्ञानिक नाम आर्थेगा एक्सविनेसिया (Orthaga exvinacea Hampson) है. यह नाक्टुइडी कुल का कीट है. इसकी मादा मुलायम पत्तियों या रेशमी जाले के अंदर 150 से 300 अंडे देती है. ये अंडे एकल या समूह में दिए जाते है. 3 से 5 दिन के उष्मायन-काल के बाद ये अंडे फूट जाते है. और इनसे छोटी-छोटी इल्लियाँ निकलती है. ये इल्लियाँ 28 से 30 दिन में 4 बार निर्मोचन करके पूर्ण विकसित हो जाती है. इसके बाद ये रेशमी भागों के सकूं में पत्तियों के जाले के अंदर प्यूपावस्था में परिवर्तित हो जाती है. इन प्यूपों से 10 से 15 दिन में वयस्क कीट निकल आते है. एक वर्ष में 5 से 6 पीढियां पाई जाती है.

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कीट की रोकथाम 

  • क्षतिग्रस्त पेड़ों से इल्लियाँ सहित जाले से गुथी हुई पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए.
  • अधिक प्रकोप होने पर 10 प्रतिशत बी० एच० सी० की धूल का बुरकाव करना चाहिए.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है, गाँव किसान (Gaon Kisan) के इस लेख से आम का पर्णजालक कीट से सम्बंधित सभी जानकारियां मिल पायी होगी. फिर भी आम के इस से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगे कमेन्ट कर जरुर बताएं, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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