आम का चूर्णी बग कीट | Mango mealy bug | Mango pests

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आम का चूर्णी बग
आम का चूर्णी बग कीट | Mango mealy bug

आम का चूर्णी बग कीट | Mango mealy bug

नमस्कार किसान भाईयों, आम का चूर्णी बग कीट ( Mango mealy bug) आम की फसल को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है. यह आम के बौर को नुकसान पहुंचता है. जिससे फलों की संख्या कम हो जाती है. जिससे किसान को हानि उठानी पड़ती है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में आम का चूर्णी बग कीट ( Mango mealy bug) की रोकथाम कैसे करे ? पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भाई अपने आम की फसल को कीट से बचा सके. और वह अधिक लाभ कमा सके. तो आइये जानते है. आम का चूर्णी बग कीट ( Mango mealy bug) की पूरी जानकारी-

चूर्णी बग की पहचान 

इस कीट की मादा लाल, पंखरहित, लगभग 10 से 12 मिमी० लम्बी और 6 मिमी० चौड़ी होती है. इसके शरीर के ऊपर दही के रंग का चूर्ण जैसा रहता है. इसी कारण इसे दहिया भी कहते है. इसके पैर छोटे-छोटे एवं श्रंगिकाएं भी छोटी-छोटी होती है. और मुखांग चूसने एवं चुभाने वाले होते है. जो काफी विकसित होते है. इसका नर रक्त के रंग का, लगभग 6 मिमी० लंबा होता है. इसके एक जोड़ी पंख होते है. इसके पंख कुछ धुएँधार काले होते है. पिछले पंख हाल्टियर में बदल जाते है. श्रंगिकाएं लम्बी होती है. नर कीट कम दिखाई देते है. तथा थोड़े समय तक जीवित रहते है.

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कीट पाए जाने वाले क्षेत्र 

यह कीट भारत, चीन, बर्मा, बाग्लादेश, श्रीलंका एवं पाकिस्तान में पाया जाता है. भारत में जहाँ-जहाँ आम उगता है. वहां-वहां इसका प्रकोप होता है. उत्तरी गंगा-जमुना के दोआब में इसका सबसे अधिक प्रकोप होता है.

आम के फसल को क्षति 

इस कीट के नर एवं मादा, दोनों के अर्भक व वयस्क आम के पौधों की पतली डालियों एवं बौर वाली टहनियों पर भरी मात्रा में जमा हो जाते है. और उनका रस चूसने लगते है. परिणाम स्वरूप फल सूख कर झड जाते है. और उन पर फलों की संख्या बहुत कम हो जाती है. जो फल लग जाते है, उनके डंठल इतने कमजोर होते है कि हवा के हलके झोकों से ही जमीन पर गिर जाते है. इसके अलावा इन कीटों से एक प्रकार का मधुस्राव निकलता है. जो पत्तियों एवं पुष्पों पर गिर जाता है. इस पर काले रंग की फफूंदी जम जाती है. जिससे पौधों की भोजन बनाने की क्रिया में अवरोध उत्पन्न होता है. वयस्क नर कोई क्षति नही पहुंचाते है.

अन्य परपोषी पौधे 

आम के अलावा यह आंवला, बेर, नींबू, अमरुद, जामुन, लीची, लोकाट, शहतूत, अनार एवं अन्य बहुत से जंगली पौधों पर भी लगता है.

कीट का जीवन चक्र 

इस कीट का वैज्ञानिक ड्रोसिका स्टेबिन्जाई (Drosicha stebbingi green) है. यह मारगैरोडिडी (Margarodidae) कुल का पौधा है. चूर्णी बग का कीट अप्रैल-मई के महीनों में मादा कीट से संगम करके उसे अंडपूर्ण (gravid) करते है. इसके बाद मादाएं पेड़ों से उतर कर उनकी जड़ों के पास 300 से 400 अंडे एक झिल्लीदार थैली में जमीन से 7-15 सेमी० नीचे देती है. ये अंडे कुछ गोल-बेलनाकार होते है. ये अंडे पहले गुलाबी और बाद में भूरे हो जाते है. अप्रैल-मई से ये अंडे साड़ी गर्मियों में इसी प्रकार पड़े रहते है. और सर्दी आरम्भ होने पर नवम्बर या दिसम्बर में इनसे छोटे-छोटे अर्भक निकलते है. अंडे देने के बाद मादा मर जाती है. इसके अर्भक भूरे रंग के होते है. इसकी टाँगे छोटी और श्रंगिकाएं गांठदार, लगभग 4 मिमी० लम्बी होती है. अर्भक पौधों के तनों के सहारे पेड़ पर चढ़ जाते है. और पेड़ों के मुलायम शाखाओं तथा टहनियों एवं पत्तियों से चिपक कर उनका रस चूसना शुरू कर देते है. इनको पेड़ों पर तनों की शाखाओं और मुलायम टहनियों पर झुण्ड में चिपके हुए देखा जा सकता है.

यह कीट तीन बार निर्मोचन करते है. प्रथम निरुप नवम्बर-दिसम्बर से फरवरी तक, द्वितीय फरवरी से मध्य मार्च तक और तृतीय निरुप मार्च से अप्रैल तक पाया जाता है. निर्मोचन के समय के प्रथम व द्वितीय निरुप के अर्भक अपने खाने के स्थान से दूर पेड़ों के छाल की दरारों में चले जाते है. और निर्मोचन के बाद पुनः उपयुक्त पत्तियों या पुष्पक्रम पर आकार उनका रस चूसना शुरू कर देते है. तृतीय निरूप के अर्भक, जो मादा में परिवर्तित होने वाले होते है. उन्ही स्थानों में चिपके रहते है. जहाँ वे रस चूसते है और मादा में परिवर्तित हो जाते है. जिन अर्भकों से नर बनते है. वे पेड़ की छाल की दरारों में जाकर प्यूपा में बदल जाते है. इनसे अप्रैल से मई के बीच पंखदार नर निकलते है. ये नर मादा की तलाश में इधर-उधर उड़ते है. और अपने एक सप्ताह के जीवन काल में एक से अधिक बार संगम करते है. संगम के 15 से 35 दिन बाद मादा अंडे देना प्रारंभ करती है. मादा अप्रैल-मई में 22 से 47 दिन तक जीवित रहती है.

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कीट का नियंत्रण 

  • जिन पेड़ों पर इस कीट का प्रकोप हुआ हो, उनकी जड़ के पास मिट्टी की 10 से 15 सेमी० की गहराई तक जून के माह में खुदाई करके पलट देना चाहिए. ऐसा करने से जमीन के अन्दर पड़े हुए हुए अंडे जमीन की सतह पर आ जाते है. और गर्मी में सूख कर नष्ट हो जाते है.
  • पेड़ों के आस-पास पड़ी हुई पत्तियों आदि को भी जला कर नष्ट कर देना चाहिए.
  • दिस्मबर माह में पौधों के टनों पर लगभग जमीन से एक मीटर ऊपर 4 सेमी० चौड़ी ग्रीस लगा देना चाहिए. इनमें उपयुक्त कीटनाशी भी मिलाया जा सकता है. ऐसा करने से अण्डों के फूटने के बाद पेड़ों पर जो अल्पायु कीट चढाते है, ये ग्रीस या तारकोल की पट्टी से ऊपर चढते समय उसमें चिपक जायेगें और ऊपर नही चढ सकेगें. इस प्रकार अल्पायु कीटों को पौधों की मुलायम टहनियों एवं पत्तियों तथा पुष्पक्रम तक पहुँचने से रोका जा सकता है.
  • तने की ग्रीस लगी पत्ती पर चिपके हुए अर्भकों को मैथिल पैराथियान के 0.1 प्रतिशत के घोल के छिड़काव द्वारा नष्ट किया जा सकता है.
  • पेड़ों की मुलायम पत्तियों, टहनियों एवं पुष्पक्रम पर चिपकी हुई चूर्णी बग को मेटासिस्टाक्स के 0.025 प्रतिशत या रोगर के 0.04 प्रतिशत घोल के छिड़काव द्वारा नष्ट किया जा सकता है.

निष्कर्ष

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान के इस लेख आम का चूर्णी बग कीट से सम्बंधित पूरी जानकारी मिल पायी होगी. फिर भी इस लेख से सम्बंधित कोई आपका प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताये, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द. 

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