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आडू की खेती कैसे करे ? – Peach Farming (हिंदी में)

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आडू की खेती
आडू की खेती (Peach Farming) कैसे करे ?

आडू की खेती (Peach Farming) कैसे करे ?

नमस्कार किसान भाईयों, आडू की खेती (Peach Farming) देश के उत्तरी भारत में पहाड़ी वाले क्षेत्रों में की जाती है. यह गर्मी के मौसम का फल है. इसको उगाकर किसान भाई अच्छा लाभ ले सकते है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में आडू की खेती (Peach Farming) की पूरी जानकारी देगा वह भी अपने देश की भाषा हिंदी में. जिससे किसान भाई इसकी अच्छी उपज ले सके. तो आइये जानते है आडू की खेती (Peach Farming) की पूरी जानकारी-

आडू के फायदे 

पीले और लाल रंग का यह फल आकार में काफी हद तक सेब जैसा लगता है. इसका सेवन मानव स्वस्थ्य के लियी काभी लाभकारी होता है. इसमें फाइबर, विटामिन, खनिज और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसके पेड़ में गोंद निकलता है. और इसमें निकलने वाली गिरी में एक ख़ास किस्म का तेल निकलता है.जो कडवे बादाम के तेल की तरह होता है. इसमें निकलने वाल तेल और गोंद काफी लाभदायक होता है. आडू के इस्तेमाल से बुखार, डायबिटीज और बवासीर जैसे रोगों का इलाज में काफी उपयोगी है. इसके सेवन से कई प्रकार के प्रोटीन और खनिज तत्व हमारे शरीर को मिलते है जिससे कई रोगों से बचाव होता है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र

आडू का वानस्पतिक नाम प्रूनस पर्सिका (Prunus persica) है. यह रोजेसी (Rosaceae) कुल का पौधा है. वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी उत्पत्ति ईरान में हुई है. भारत में इसकी खेती उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में 3200 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में की जाती है. यह मुख्य रूप से कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में की जाती है.

भूमि एवं जलवायु

आडू की खेती के लिए शीतोष्ण जलवायु उपयुक्त होती है. इसके अलावा बसंत ऋतु में जहाँ पाला कम पड़ता हो और ओला रहित वर्षा सर्वोत्तम होती है. द्रुतशीतन आवश्यकता वाली किस्मों को उपोष्ण जलवायु में भी उगाया जा सकता है.

इसकी खेती के लिए हल्की दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे सर्वोत्तम होती है. इसकी अवाला 2.5 से 3 मीटर तक गारी जीवांश युक्त मिट्टी होनी चाहिए. भूमि का पी०एच० मान 5.5 से 6.5 के बीच का होना चाहिए. इसके अलावा भूमि से उचित जल निकास की व्यवस्था होनी चाहिए.

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आडू की उन्नत किस्में 

आडू की क्षेत्र के अनुसार निम्न लिखित उन्नत किस्में है-

  • जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराँचल के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एल्बर्टा, हिलवर्टाजाइंट, अलेक्जेंडर, नोवलेस, तोतापरी आदि प्रमुख किस्में है.
  • मैदानी क्षेत्रों के लिए फ्लोरडासन, शान-ए-पंजाब, फ्लोरडारेड, शरबती, सनरेड, सहारनपुर प्रभात आदि प्रमुख उन्नत किस्में है.
  • उत्तर प्रदेश के लिए फ्लोरडासन, शान-ए-पंजाब, शरबती और सहारनपुर प्रभात आदि प्रमुख उन्नत किस्में है.

खेत की तैयारी 

आडू के पौधों की अच्छी वृध्दि के लिए भूमि को अच्छी प्रकार तैयार कर लेना चाहिए. इसके लिए खेत से खरपतवारों को खेत से साफकर नष्ट कर देना चाहिए. इसके बाद खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई कर कर पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरी व समतल कर लेना चाहिए.

खेत तैयारी के बाद आडू के पौधे लगाने के लिए एक मीटर चौड़ा एवं दो से ढाई मीटर गहरा गड्ढा खोद लेना चाहिए. इन गड्ढों को पंक्तियों में खुदाई करनी चाहिए. जिसमें पौधे से पौधे की बाच की दूरी 5 से 7 मीटर तक होनी चाहिए. इन खोदे गयी गड्ढों में गोबर की सड़ी हुई खाद एवं मिट्टी बराबर मात्रा में मिलाकर भर देना चाहिए एवं पानी की उचित मात्रा में सिंचाई कर देनी चाहिए. जिससे मिट्टी नीचे बैठ जाय. इन गड्ढों को पोधे लगाने के एक महीना पहले खोद के तैयार कर लिया जाता है.

प्रवर्धन की विधियाँ  

आडू के पौधों की अच्छी वृध्दि और उपज के लिए प्रवर्धन विधियाँ अपनानी चाहिए. इसके लिए जीभी कलम व ढाल चश्मा विधियाँ अपनानी चाहिए. आडू के बीजू पौधे मूल्व्रांत के लिए विशेष रूप से प्रयोग करते है. इसके लिए अलूचा, खुबानी व बादाम के मूल वृंत को भी प्रयोग किया जा सकता है.

पौधा लगाने का समय व तरीका 

आडू का पौधा लगाने का सबसे उचित समय जनवरी-फरवरी का महीना होता है. पौधा लगाने से पहले एक महीना पहले खोदे गए गड्ढे को गोमूत्र या बाविस्टीन से उपचरित कर लेना चाहिए.उसके बाद पौधे को गड्ढे में लगाकर अच्छी चारो तरफ से दबा देना चाहिए. और थाला अच्छी प्रकार से बना देना चाहिए.

सिंचाई 

आडू के पौधे की अच्छी वृध्दि के लिए सिंचाई बहुत ही आवश्यक है. जब पौधा लगाए तो तुरंत ही सिंचाई कर दे. शुरुवात में नए पौधों की सप्ताह में एक बार सिंचाई जरुर करे . इसके अलावा तैयार पौधों में गरमी के दिनों में 10 दिन के अंतराल पर जरुर सिंचाई करे. इसके अलावा आवश्यकतानुसार सिंचाई भी कर सकते है.

उर्वरक की मात्रा 

आडू के पौधे में अच्छे वृध्दि और तैयार पौधों में अच्छी उपज के लिए उर्वरक एवं खाद की उचित मात्रा का प्रयोग जरुर करना चाहिए. इसके लिए 30 से 35 किग्रा० गोबर की सड़ी हुई खाद और इसके साथ 2 किग्रा० कैल्सियम अमोनिया नाइट्रेट, 1.5 किग्रा० सुपर फास्फेट और 1 किग्रा० म्यूरेट ऑफ पोटाश का उपयोग प्रति वर्ष प्रति पेड़ जरुर करना चाहिए. फ़ॉस्फोरस की पूरी व पोटाश की आधी मात्रा फरवरी और शेष मात्रा मार्च तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा फरवरी व आधी मात्रा अप्रैल में देनी चाहिए.

सधाई एवं काट-छांट 

उथली भूमियों में आडू की सधाई रूपांतरित अग्र प्ररोह विधि से करनी चाहिए. गहरी भूमियों में सधाई खुल मध्य विधि से करनी चाहिए. बड़े पौधों की छंटाई प्रति वर्ष करनी चाहिए. गहरी भूमियों में सधाई खुल मध्य विधि से करनी चाहिए. बड़े पौधों की छंटाई प्रति वर्ष करनी चाहिए. छंटाई करते समय पुरानी वृध्दि की टहनियों के ऊपर के 1/3 भाग को काट देना चाहिए. आपस में भिड़ी हुई टहनियों को भी निकाल देना चाहिए.

बाग़ में लगाए जाने वाली सह-फसले 

आडू के लगाये गए बाग़ में शुरुवात की तीन से चार साल में सह फसले ली जाती है. इसमें किसान भाई सब्जी की खेती व पपीता आदि फलों की उपज ली जा सकती है. जिससे किसान भाई अतरिक्त आय प्राप्त कर सकते है.

फूल एवं फल आने का समय 

आडू की पेड़ में फूल आने का समय फरवरी से मार्च तक का है. यह फूल अप्रैल से मई तक पक कर तैयार हो जाते है.

फलों की तुड़ाई 

आडू के पेड़ से फल की शुरुवात तीन से चार साल बाद शुरू होती है. जब फलों का रंग किस्म के अनुसार पकने पर आकर्षक दिखाई देने लगे तब फलों की तुड़ाई कर लेनी चाहिए. फलों की तुड़ाई फल पकने पर ही करे, पहले तुड़ाई कर लेने से फलों की गुणवत्ता कम हो जाती है. और बाजार में भाव अच्छा नही मिलता है.

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उपज 

आडू का पेड़ शुरुवात में वर्षों में 10 से 15 किलो तक उपज देते है. लेकिन पेड़ों की वृध्दि के साथ इनका उत्पादन बढ़ जाता है. जबकि 10 से 15 वर्ष का तैयार पेड़ 60 से 80 किलोग्राम तक की उपज दे देता है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) के आडू की खेती (Peach Farming) से सम्बंधित इस लेख से आपको सभी जानकारियां मिल पायी होगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा आडू के फायदे से लेकर आडू की उपज तक की सभी जानकरियां दी गयी है. फिर भी आडू की खेती (Peach Farming) से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा गाँव किसान (Gaon Kisan) का यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताएं, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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